Skills vs Degrees: क्या सिर्फ डिग्री आपको अच्छी नौकरी दिला सकती है? कई एक्सपर्ट का मानना है कि आज के दौर में कंपनियां डिग्री से ज्यादा हुनर यानी स्किल्स को अहमियत दे रही हैं. जानिए आप खुद को आज के जॉब मार्केट के लिए कैसे तैयार कर सकते हैं.
नई दिल्ली (Skills vs Degrees). दशकों तक डिग्री को नौकरी पाने का गोल्डन टिकट माना जाता था. अगर आपके पास किसी बड़ी यूनिवर्सिटी की डिग्री है तो मान लिया जाता था कि आप बुद्धिमान और काबिल हैं. लेकिन अब दुनिया बदल चुकी है. इन दिनों कंपनियां यह नहीं पूछतीं कि आपने क्या पढ़ाई की है? बल्कि उनका सीधा सवाल होता है- क्या आप यह काम कर सकते हैं? आज का दौर केवल डिग्री का नहीं, बल्कि ‘करके दिखाने’ का है.
इसका मतलब यह नहीं कि डिग्री की अहमियत खत्म हो गई है. लेकिन यह अब सिर्फ शुरुआती कदम बनकर रह गई है. डिग्री आपको इंटरव्यू लेवल तक पहुंचा सकती है, मगर उस कमरे के अंदर टिके रहने और आगे बढ़ने के लिए स्किल्स की जरूरत होती है. तेजी से बदलती इकोनॉमी में वही लोग सफल हैं, जो सिर्फ पढ़ाई के भरोसे नहीं बैठे, बल्कि रोज कुछ नया सीख रहे हैं. Marching Sheep की फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर सोनिका एरोन से जानिए, आज के दौर में डिग्री और स्किल्स के बीच की जंग असल में क्या है.
डिग्री vs स्किल्स: क्या सच में बदल गया है भर्ती का तरीका?
नौकरी की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है. एआई के दौर में खुद को नई टेक्नोलॉजी से अपडेटेड रखना बहुत जरूरी हो गया है. ज्यादातर युवा प्रोफेशनल्स कंफ्यूज्ड हैं कि नौकरी में टिके रहने के लिए डिग्री पर फोकस करें या स्किल्स पर.
डिग्री जरूरी है, पर काफी नहीं
डॉक्टर, वकील या इंजीनियर जैसे प्रोफेशन में डिग्री आज भी नींव की तरह है. सोनिका एरोन बताती हैं कि मान लीजिए, आपने बुनियादी पढ़ाई की है और आपमें अनुशासन भी है. लेकिन हर साल लाखों युवा ग्रेजुएट हो रहे हैं, ऐसे में सिर्फ डिग्री आपको भीड़ से अलग नहीं खड़ी कर सकती. कंपनियां अब ऐसे लोग ढूंढ रही हैं जो किताबी ज्ञान को हकीकत में इस्तेमाल करना जानते हों.
बढ़ रही है स्किल्स की मांग
दुनिया जितनी तेजी से बदल रही है, उतनी तेजी से किताबें नहीं बदली जा सकतीं. इसलिए कंपनियां उन उम्मीदवारों को पसंद कर रही हैं जिनके पास:
- डिजिटल पकड़: AI टूल्स और डेटा को समझने की काबिलियत
- बातचीत का तरीका: दूसरों के साथ मिलकर काम करना और अपनी बात सही से रखना
- सोचने की क्षमता: मुश्किलों का नया और आसान हल निकालना आता हो.
डिग्री के आगे हुनर क्यों जीत रहा है?
- बदलाव की स्पीड: जो तकनीक 5 साल पहले नई थी, वह आज पुरानी हो चुकी है. ऐसे में ‘लाइफ-लॉन्ग लर्निंग’ (हमेशा सीखते रहना) ही एकमात्र रास्ता है.
- काम बोलता है: अब पोर्टफोलियो, प्रोजेक्ट्स और पिछले काम के नतीजे ज्यादा देखे जाते हैं. अगर आप काम करके दिखा सकते हैं तो कई कंपनियां डिग्री की शर्त भी हटा रही हैं.
- बराबरी का मौका: स्किल्स के आधार पर उन लोगों को भी अच्छी नौकरी मिल रही है, जिनके पास बड़ी यूनिवर्सिटी की डिग्री नहीं है, लेकिन काम का जबरदस्त अनुभव है.
नए दोर में नौकरी कैसे मिलेगी?
आज कंपनियां सिर्फ काबिलियत नहीं, बल्कि कैंडिडेट का नजरिया भी देखती हैं. क्या आप नई चीजें सीखने के लिए तैयार हैं? क्या आप तनाव में भी शांत रहकर काम कर सकते हैं? इंटरव्यू अब सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं हैं; अब कंपनियां आपसे असाइनमेंट करवाती हैं और प्रैक्टिकल टेस्ट लेती हैं. उसमें सफल होने पर ही नौकरी पक्की होती है.
करियर अब सिर्फ 21 साल की उम्र में मिली डिग्री से तय नहीं होता. यह 30, 40 और 50 की उम्र में आपकी सीखने की इच्छा से तय होता है. डिग्री ‘बायोडेटा’ चमकाती है तो स्किल्स करियर बनाती हैं.

