Side Hustle Culture: क्या साइड हसल जेन जी के लिए आर्थिक आजादी का रास्ता है या यह उन्हें मानसिक थकान की तरफ धकेल रहा है? जानिए कैसे आज की युवा पीढ़ी अपनी पहचान और फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए एक साथ कई काम कर रही है और कंपनियों का इस पर क्या नजरिया है.

नई दिल्ली (Side Hustle Culture). साइड हसल यानी मुख्य नौकरी के साथ बिजनेस या फ्रीलांस करना नया नहीं है. लेकिन Gen Z जिस तरह से इसे अपना रही है, उससे करियर के पुराने मायने बदल गए हैं. इस पीढ़ी के लिए साइड हसल सिर्फ एक्सट्रा पैसा कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि आर्थिक अनिश्चितता के दौर में खुद की खास पहचान बनाने की कोशिश है. कोरोना महामारी के बाद वर्कफोर्स में आए इन युवाओं ने छंटनी और कई बदलावों को करीब से देखा है. इसलिए वे केवल एक सैलरी पर निर्भर नहीं रहना चाहते.

Marching Sheep की फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर सोनिका एरोन का कहना है कि युवा पीढ़ी अपनी जॉब को लेकर डरी हुई नहीं है, बल्कि सतर्क है. वह जानती है कि अगर नौकरी गई तो भी कमाई का दूसरा जरिया तैयार होना चाहिए. आज का युवा कंटेंट क्रिएशन, फ्रीलांसिंग या ई-कॉमर्स के जरिए आय के कई सोर्स बना रहा है. यह FIRE (फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, रिटायर अर्ली) का सपने पूरा करने का जरिया भी है. हालांकि, दो प्रोफेशनल जिंदगियां एक साथ जीने के अपने रिस्क भी हैं.

साइड हसल क्यों कर रही है युवा पीढ़ी?

जेन जी ने एक ऐसे समय पर करियर शुरू किया है, जब स्टार्टअप्स का डूबना और बड़े पैमाने पर छंटनी आम बात हो गई है. ऐसे में एक ही नियोक्ता (Employer) पर पूरी तरह निर्भर रहना उन्हें करियर के लिहाज से जोखिम भरा लगता है. साइड हसल उनके लिए मजबूत ढाल की तरह है, जो उन्हें पैसे की तंगी से तो बचाता ही है, साथ ही उन्हें अपनी शर्तों पर जीने का भरोसा भी देता है.

पहचान और उद्देश्य की तलाश में है जेन जी

आज की युवा पीढ़ी यानी जेन जी प्रोफेशनल्स केवल सैलरी के लिए काम नहीं करना चाहते. वे किसी ऐसे काम में समय इनवेस्ट करना चाहते हैं, जो उनकी वैल्यूज और क्रिएटिविटी से मेल खाए. अगर उनकी मुख्य नौकरी उन्हें यह संतुष्टि नहीं देती तो वे अपने शौक को ही साइड बिजनेस या फ्रीलांसिंग के जरिए पूरा करने लगते हैं. इससे उन्हें कहीं तो सुकून का अहसास होता है.

FIRE मूवमेंट और जल्दी रिटायरमेंट की चाहत

पुरानी पीढ़ियों से तुलना करें तो आज का युवा रिटायरमेंट को बुढ़ापे का लक्ष्य नहीं मानता. इसका मतलब है कि अब उम्र के 60वें पड़ाव पर रिटायरमेंट का दौर थम रहा है. आज की पीढ़ी FIRE- फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, रिटायर अर्ली पर भरोसा करती है. इसी विचार ने उन्हें कम उम्र में संपत्ति बनाने के लिए मोटिवेट किया है. साइड हसल इस स्पीड को तेज करने का प्रभावी तरीका बन गया है.

बर्नआउट का खतरा: प्रोडक्टिविटी की अंधी दौड़

सोशल मीडिया पर ‘हमेशा काम करते रहने’ के कल्चर को काफी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है. जब एक साइड हसल दूसरी नौकरी की तरह भारी पड़ने लगता है तो तनाव (Burnout) का खतरा बढ़ जाता है. आज-कल के युवा (Gen Z) एक अजीब उलझन में फंसे हैं- वे जानते तो हैं कि आराम और मानसिक शांति जरूरी है, लेकिन सोशल मीडिया उन्हें हर वक्त कुछ न कुछ ‘बड़ा’ करने के लिए उकसाता रहता है.

कंपनियों का बदलता नजरिया: साइड हसल खतरा या अवसर?

शुरुआत में कंपनियां साइड हसल को ध्यान भटकने या हितों के टकराव (Conflict of Interest) के रूप में देखती थीं. लेकिन अब कई कंपनियां इसे पॉजिटिव रूप में देख रही हैं. साइड प्रोजेक्ट चलाने वाले एंप्लॉइज अक्सर मार्केटिंग, डिजिटल टूल्स और प्रॉब्लम सॉल्विंग जैसी स्किल्स में ज्यादा माहिर होते हैं, जिसका फायदा सीधे तौर पर कंपनी को भी मिलता है.

साइड हसल न तो पूरी तरह अच्छे हैं और न ही बुरे. इसकी सफलता इस पर निर्भर करती है कि आप अपनी सीमाएं कैसे तय करते हैं. साइड हसल के साथ भी वर्क-लाइफ बैलेंस बनाना जरूरी है.

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