बजट 2026: रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सीनियर सिटीजन कंसेशन फिर बहाल करने की तैयारी!
बजट 2026 से पहले वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आ रही है, जिसमें सूत्रों के मुताबिक भारतीय रेलवे कोविड काल (मार्च 2020) से बंद पड़ी सीनियर सिटीजन रेल टिकट छूट को फिर से बहाल करने पर विचार कर रहा है. रेल मंत्रालय ने इस संबंध में वित्त मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें चर्चा की गई है कि 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुषों को किराए में 40% और 58 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को 50% तक की पुरानी रियायतें वापस मिल सकती हैं. पहले यह सुविधा स्लीपर और एसी जैसी सभी श्रेणियों में बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के केवल उम्र के आधार पर उपलब्ध थी. हालांकि इस पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है, लेकिन बजट सत्र में इस सामाजिक सुविधा की वापसी की घोषणा होने की प्रबल संभावना है, जिससे करोड़ों बुजुर्ग यात्रियों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ होगा.
बजट 2026: अर्थव्यवस्था को बढ़ाना है तो कहां होना चाहिए बजट का फोकस, रघुराम राजन ने बताया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सुझाव दिया है कि आगामी बजट को केवल एक वार्षिक दस्तावेज न मानकर इसे देश के ‘लॉन्ग टर्म विजन’ के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाया जा सके. पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया इस समय एक खतरनाक दौर से गुजर रही है, इसलिए विकास को गति देने के लिए दूरगामी रणनीतियों की जरूरत है. राजन ने पुरानी पंचवर्षीय योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी बजट और योजनाओं के बीच तालमेल की कमी रही है, जिसे अब सुधारना अनिवार्य है ताकि देश की ग्रोथ को स्थायी मजबूती मिल सके.
बजट 2026: कैपिटल गेंस टैक्स में कटौती हुई तो 5% तक भाग सकता है बाजार, समीर अरोड़ा ने बताया पूरा गणित
दिग्गज फंड मैनेजर समीर अरोड़ा का मानना है कि बजट 2026 से शेयर बाजार को किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, हालांकि उनका कहना है कि अगर सरकार सीमित समय के लिए ही सही, कैपिटल गेंस टैक्स में कटौती का ऐलान करती है तो मार्केट 4-5 फीसदी तक उछल सकता है. अरोड़ा के अनुसार, टैक्स कम होने से निवेशकों का रिटर्न सीधे तौर पर बढ़ेगा और बाजार का सेंटिमेंट बेहतर होगा, लेकिन लॉन्ग टर्म में बाजार की दिशा अगले 6-9 महीनों की अर्निंग्स ग्रोथ और ग्लोबल ट्रेड पर ही निर्भर करेगी. साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) पर भारत के बजाय उनके अपने देश में टैक्स लगना चाहिए, हालांकि मौजूदा सिस्टम में बड़े बदलाव की संभावना कम ही है.
Budget 2026: सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्रों को बुनियादी ढांचे का दर्जा मिले: पर्यटन उद्योग
Depot48 के विकास नरूला ने हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को केवल खाने-पीने की जगह के बजाय एक सामाजिक और सांस्कृतिक बुनियादी ढांचे के रूप में देखने की अपील की है. उनका तर्क है कि उनके जैसे सांस्कृतिक केंद्र साल भर कलाकारों और स्थानीय समुदायों को रोजगार देते हैं, लेकिन सरकारी नीतियां उन्हें अब भी सिर्फ अस्थायी उपभोग की श्रेणी में रखती हैं. उन्होंने मांग की है कि बजट 2026 में ऐसे केंद्रों के लिए एक स्थिर रेगुलेटरी और फाइनेंशियल ढांचा तैयार किया जाए, जहां टैक्स और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया निरंतरता (Continuity) पर आधारित हो, ताकि वे शहरों के विकास और पर्यटन में अधिक आत्मविश्वास के साथ योगदान दे सकें.
Budget 2026: पर्यटन को ‘उद्योग का दर्जा’, होटल प्रोजेक्ट्स के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस की मांग
Budget 2026: थॉमस कुक इंडिया के महेश अय्यर का पूरा जोर पर्यटन को ‘उद्योग का दर्जा’ (Industry Status) दिलाने पर है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को कम ब्याज दरों पर आसानी से लोन मिल सके. उन्होंने आध्यात्मिक केंद्रों और छोटे शहरों (Tier II/III) में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और होटल प्रोजेक्ट्स के लिए ‘सिंगल-विंडो क्लियरेंस’ शुरू करने की मांग की है. साथ ही, उन्होंने विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वीजा नीतियों को आसान बनाने, ई-वीजा को तेज करने और एआई (AI) जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है ताकि भारत को एक ग्लोबल टूरिज्म हब बनाया जा सके.
Budget 2026: जीएसटी प्रकिया में बड़े बदलाव समेत और क्या चाहता है इंश्योरेंस सेक्टर
SOTC Travel के विशाल सूरी ने जीएसटी (GST) प्रक्रिया में बड़े बदलावों की वकालत की है. उनका कहना है कि अब जीएसटी दरें तय करने से आगे बढ़कर पूरे देश के लिए ‘सेंट्रलाइज्ड रजिस्ट्रेशन’ और ‘सिंगल रिटर्न’ फाइलिंग की सुविधा दी जानी चाहिए ताकि कागजी कार्रवाई का बोझ कम हो. इसके साथ ही, उन्होंने विदेश यात्रा पर लगने वाले टीसीएस (TCS) की जटिल दरों (5% और 20%) को खत्म कर इसे सभी के लिए फ्लैट 1% करने का सुझाव दिया है. इससे यात्रियों की जेब पर तुरंत पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होगा और बाजार में नकदी (Liquidity) का प्रवाह बेहतर बना रहेगा.
सस्टेनेबल पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स के लिए ग्रीन इंसेंटिव भी बढ़ाए जाने चाहिए
रिधिमा कंसल, डायरेक्टर, Rosemoore ने कहा कि भारत का रिटेल उद्योग 2032 तक 2 ट्रिलियन डॉलर का बन सकता है. ऐसे में आने वाले यूनियन बजट से इस सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदमों की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि GST स्लैब को सरल किया जाना चाहिए, ताकि छोटे और मझोले कारोबारों (SMEs) के लिए नियमों का पालन करना आसान हो सके. उन्होंने ECLGS जैसे क्रेडिट प्रोग्राम्स के विस्तार की भी मांग की, जिससे रिटेल कारोबारियों को आसानी से लोन मिल सके. इसके साथ ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जरूरी है, ताकि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से रिटेल (ओम्नी-चैनल) को बढ़ावा मिल सके.
रिधिमा कंसल ने कहा कि Make in India को मजबूत करने के लिए कंज्यूमर प्रोडक्ट्स पर PLI इंसेंटिव जारी रहने चाहिए, साथ ही सस्टेनेबल पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स के लिए ग्रीन इंसेंटिव भी बढ़ाए जाने चाहिए. उन्होंने टूरिज्म से जुड़े रिटेल को बढ़ाने के लिए ई-वीजा के विस्तार और शहरी विकास में निवेश की भी जरूरत बताई. उनके अनुसार, ये सभी कदम महंगाई से निपटने, खपत बढ़ाने और देश की GDP ग्रोथ को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे.
कार्बन मार्केट से जुड़ा बदलाव
यशोधन रामटेके, CEO और डायरेक्टर, EcoGuard Global ने कहा कि भारत अब स्वैच्छिक कार्बन क्रेडिट सिस्टम से आगे बढ़कर अनिवार्य (कम्प्लायंस) आधारित कार्बन मार्केट की ओर जा रहा है. ऐसे में अब सिर्फ कार्बन क्रेडिट की संख्या पर नहीं, बल्कि मार्केट की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर ध्यान देना जरूरी है.
उन्होंने बताया कि कार्बन रजिस्ट्री, MRV और dMRV सिस्टम और डिजिटल ट्रस्ट प्लेटफॉर्म अब केवल तकनीकी सुविधाएं नहीं हैं, बल्कि क्लाइमेट और फाइनेंस से जुड़ा अहम इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुके हैं. सरकार को नीति स्तर पर इन सिस्टम्स को मजबूत समर्थन देना चाहिए, ताकि कार्बन क्रेडिट का जारी होना, उसकी ट्रैकिंग और सही तरीके से उपयोग पूरी तरह भरोसेमंद हो सके.
उनका कहना है कि अगर यह मजबूत आधार नहीं बना, तो भारत का कार्बन बाजार भले ही बड़ा हो जाए, लेकिन उस पर भरोसा नहीं बनेगा. इससे वैश्विक कार्बन बाजारों से जुड़ने में दिक्कत आएगी और भारतीय कार्बन क्रेडिट्स को बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी सीमित रह जाएगी.
भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र के लिए राय
ईवी उद्योग पर प्री-बजट अपेक्षाएं – श्री आयुष लोहिया, सीईओ, यूधा (Youdha) के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. नीचे कुछ प्रमुख अपेक्षाएं दी गई हैं, जिनका मानना है कि ये इस क्षेत्र के लिए सरकार के वित्तीय रोडमैप को दिशा देनी चाहिए-
1- ग्रीन-फाइनेंस और कम-लागत वाहन वित्त
ग्रीन बॉन्ड्स के दायरे का विस्तार करना और ईवी फाइनेंसिंग के लिए कम ब्याज दरें उपलब्ध कराना बेहद जरूरी होगा, ताकि 2035 तक भारतीय ईवी बाजार में अनुमानित 17% सीएजीआर (CAGR) को बनाए रखा जा सके.
2- बैटरी सेल्स के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI)
एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स (ACC) के लिए हालिया पीएलआई योजना के तहत पहले ही 40 GWh की घरेलू क्षमता सुनिश्चित की जा चुकी है. मेरा मानना है कि बजट में अतिरिक्त ₹2,000 करोड़ का आवंटन गीगाफैक्ट्री परियोजनाओं के विस्तार को तेज करेगा, सेल की लागत कम करेगा और ईवी को अधिक किफायती बनाएगा.
3- चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा
वर्तमान में केवल लगभग 9,400 सार्वजनिक चार्जर ही स्थापित हैं, जिससे अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है. हमें पीएम ई-ड्राइव पहल पर नए सिरे से जोर देने की उम्मीद है, जिसमें हाईवे और शहरी केंद्रों पर फास्ट-चार्जिंग कॉरिडोर के लिए अतिरिक्त ₹1,500 करोड़ निर्धारित किए जाएँ.
4- प्रीमियम ईवी के लिए कस्टम ड्यूटी का युक्तिकरण
एसपीएमईपीसीआई (SPMEPCI) योजना, जो आयातित सीबीयू पर 15% रियायती शुल्क प्रदान करती है, अभी तक आवेदकों को आकर्षित नहीं कर पाई है. आने वाले भारत-ईयू एफटीए के अनुरूप शुल्क संरचना को संरेखित करना एक व्यावहारिक कदम हो सकता है, जिससे प्रीमियम ईवी निर्माता स्थानीय असेंबली स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित होंगे.
5- घरेलू कंपोनेंट इकोसिस्टम को समर्थन
ईवी की बढ़ती पैठ के साथ ऑटो-कंपोनेंट निर्यात का अवसर $100 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है. कंपोनेंट निर्माताओं के लिए पूंजीगत सब्सिडी और एसजीएसटी प्रतिपूर्ति जैसे बजटीय प्रावधान सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे और आयात पर निर्भरता कम करेंगे.
हम सरकार से आग्रह करते हैं कि मांग-पक्ष सब्सिडी, उत्पादन प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचे पर खर्च और व्यापार-नीति में सुधारों का संतुलित मिश्रण अपनाया जाए, ताकि 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहनों के लक्ष्य को हासिल किया जा सके.

